“काकोरी काण्ड” अब “काकोरी ट्रेन एक्शन”
9 अगस्त, 1925 को घटित काकोरी ट्रेन एक्शन को हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी और रोशन सिंह के लिए याद किया जाता है।
उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ‘काकोरी कांड’ का नाम बदलकर ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’ कर दिया है। ब्रिटिश कालीन इतिहासकारों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी इस महत्वपूर्ण घटना के नाम में ‘कांड’ जोड़ दिया था, जो अपमान की भावना को दर्शाता है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने काकोरी की घटना को ट्रेन एक्शन करार दिया और कांड शब्द को हमेशा के लिए मिटा दिया।
भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को ‘चौरी चौरा महोत्सव’ कार्यक्रम के तहत ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ की 97वीं वर्षगांठ मनाई। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए और देश की स्वाधीनता के लिए बलिदान देने वाले अमर क्रांतिकारी को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना में क्रांतिकारियों के हाथ केवल 4600 रुपए लगे थे। लेकिन अंग्रेजों ने इस घटना से जुड़े सभी क्रांतिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में 10 लाख रुपए खर्च किए थे। काकोरी एक्शन की कहानी हमें सदैव इस बात का एहसास कराती है कि देश की स्वाधीनता से बढ़कर कुछ नहीं है। हर भारतीय का यह दायित्व है कि हम देश की इस आजादी को हर हाल में सुरक्षित रखें।”
क्या है काकोरी ट्रेन एक्शन?
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को मात देने के लिए क्रांतिकारियों ने कई आंदोलन चलाए. इसी में शामिल है ‘काकोरी ट्रेन एक्शन डे’। 9 अगस्त, 1925 को घटित काकोरी ट्रेन एक्शन को हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी और रोशन सिंह के लिए याद किया जाता है।
उस दिन ट्रेन लखनऊ से करीब 8 मील की दूरी पर थी, तब उसमें बैठे इन तीनों क्रांतिकारियों ने उसे रुकवाया और सरकारी खजाने को लूट लिया था। स्वतंत्रता सेनानियों ने खजाना लूटने के लिए जर्मन माउजर का इस्तेमाल किया था। उनके हाथ सरकारी खजाने से 4600 रुपए लगे। काकोरी कांड के आरोप में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और रोशन सिंह को फांसी दे दी गई थी।